Tuesday, September 6, 2011

कहाँ गया मेरा वो बचपन...

जैसे जैसे घड़ी की सुई चलती गई,
मेरा बचपन मुझसे दूर होता गया...
माँ की ममता में पला बड़ा,
अब दोस्तों के बीच बैठा पड़ा...
कहाँ गया मेरा वो बचपन...
वो पापा के कंधे पर घूमना,
और आज उनके ही कंधे से कंधे मिला के चलना...
दादा की ऊँगली को अपना सहारा बनाना,
और आज उन्हें ही अपने ऊँगली का सहारा देना...
कहाँ गया वो मेरा बचपन....
ना थी किसी की चिंता,ना था किसी का  डर ..
फिर क्यूँ है मुझे आज दुनिया से वैर...
वो सुबह सुबह अपनी हस्सी की खिल खिलाहट,
और आज की सुबह में कुछ अनहोनी की आहट...
कहाँ गया मेरा वो बचपन.....


 

Monday, September 5, 2011

लाइटेंन लगा रही है तीर पे निशाना....

पोलिटिकल मैनेजमेंट में अपना नाम कमाने वाले और बिहार को लाइटेंन की रौशनी तक ही रखने वाले ,चौरंगा पाठशाला के टोप्पर रह चुके और तीर की वार से हारे हुए लालू जी रह-रह कर नितीश सरकार पे वार कर रहे है, पर अफ़सोस सफल नई हो पा रहे | १५ सालो तक बिहार में राज कर चुके लालू जी फिर से अपना राजगद्दी चाहते है,अब चाहे भी क्यूँ नहीं हर जगह से उन्हें हार जो मिल रही है पहले रेल मंत्रालय छोडना परा  और अभी हाल ही में उन्हें संसद के स्टैंडडींग कमिटी से हटाने की बात की जा रही है|
लालू जी का कहना है की नीतीश कुमार भाजपा की गोद में बैठे है और बिहार को गुजरात की तरह बनाना चाहते है, बिहार में हुए फोर्बेस्गंज फाईरिंग को गुजरात के दंगे का नाम देते हुए लालू ने कहा की वो वही कांड बिहार में दोहराना चाहते है| अब लालू जी की नजरिया ही गुजरात के प्रति अलग ही है, पर जनता की तो नहीं,आज सब जानते है बिहार कहा से कहा पहुँच गया कच्ची सड़क अब पक्की बन गई,लाइटेंन की रौशनी ट्युब लाइट में बदल गई,शिक्षा आगई पर लालू जी को कहा ये सब दिखा, विपक्ष जो रह गए वो | लालू खुद ही भूल गए की एक समय था जब वो कांग्रेस के गोद में बैठा करते थे पर उनकी चाल चलन से उन्हें कांग्रेस ने गोद से गिरा दिया | बिहार के लोगो को नितीश कुमार के खिलाफ भड्खाने वाले लालू को पता ही नई की वो आज की जनता से बात का रहे है वो समय गया जब जात-पात को लेकर जनता आपस में लड़ा करती थी, लालू जी को शायद ये नहीं पता की अब पोलिटिक्स का मैनेजमेंट कुछ अलग ही हो गया है|
एक लाइटेंन की रोशिनी कभी भी लौ नहीं बन सकता और ना ही वो कभी तीर को अपना निशाना बना सकती है,लालू जी की भलाई तो इसी में की वो अब आराम से राबड़ी के साथ लाइटेंन लाइट डीनर करे और खुश रहे क्या पता कही तीर का निशाना वो ना बन जाए और फिर उनके लिए कल हो ना हो... .....

Thursday, September 1, 2011

गांधीगीरी के बाद अब अन्नागीरी की बारी...


मोहन दास करमचंद गाँधी और किशन बाबू राव हजारे नाम अलग है पर इन दोनों महापुरुष के विचार एक  है,दोनों अहिंषा के पुजारी.एक को हम बापू के नाम से पुकारते है तो दूसरे को अन्ना के नाम से,आज पूरा भारत इन दोनों पुरषों की दीवानी है,इन्होने ने तो एक इतिहास ही रच ही दिया.
इनके उसूलों को हमने एक नया नाम दिया गाँधी के उसूलों को गांधीगीरी और अन्ना के उसूलों को अन्नागीरी.जिस तरह गांधीगीरी पर फ़्लिम लगे रहो मुन्ना भाई बनी थी बस कुछ उसी तरह अब परक्टिकल तरीके से अन्नागीरी की पढाई होगी.
झारखण्ड के जमशेदपुर शहर में स्थित महशूर संस्थान एक्स एल आर आई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड ह्उमं रेसेअर्च में जल्द हे अन्नागिरी की पढाई हो सकती है इसका मतलब ये की अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का सफल आंदोलन प्रबधन के छात्रों की पढाई के लिए उपयुक्त विषय बनेगा,और साथ ही साथ अन्ना के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के पहलुओ पर गंभीरता से विचार संस्थान करेंगी...
फ़्लिम तो सुपरहिट हो गई अब देखना ये की पढाई क्या होती है पास या फ़ैल ?........
गांधीगीरी के बाद अब अन्नागीरी की बारी...
मोहन दास करमचंद गाँधी और कृष्ण बाबू राव हजारे नाम अलग है पर इन दोनों महापुरुष के विचार एक  है,दोनों अहिंषा के पुजारी.एक को हम बापू के नाम से पुकारते है तो दूसरे को अन्ना के नाम से,आज पूरा भारत इन दोनों पुरषों की दीवानी है,इन्होने ने तो एक इतिहास ही रच ही दिया.
इनके उसूलों को हमने एक नया नाम दिया गाँधी के उसूलों को गांधीगीरी और अन्ना के उसूलों को अन्नागीरी.जिस तरह गांधीगीरी पर फ़्लिम लगे रहो मुन्ना भाई बनी थी बस कुछ उसी तरह अब परक्टिकल तरीके से अन्नागीरी की पढाई होगी.
झारखण्ड के जमशेदपुर शहर में स्थित महशूर संस्थान एक्स एल आर आई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड ह्उमं रेसेअर्च में जल्द हे अन्नागिरी की पढाई हो सकती है इसका मतलब ये की अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का सफल आंदोलन प्रबधन के छात्रों की पढाई के लिए उपयुक्त विषय बनेगा,और साथ ही साथ अन्ना के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के पहलुओ पर गंभीरता से विचार संस्थान करेंगी...
फ़्लिम तोह सुपर हिट हो गई अब देखना ये की पढाई क्या होती है फ़ैल या पास........

Tuesday, August 30, 2011

गाँधी टोपी में छुपे है यूथ के नए आइकॉन ?


तीन महीने पहले किसी ने सोचा भी नई था की एक व्वक्ति जो सिर पे गाँधी टोपी,सफेद धोती कुर्ता और गाँधी जैसी चाल, ७४ साल के इस व्वक्ति जिसकी पहले महाराष्ट्र दीवानी थी और आज पूरी भारत दीवानी है आखिर यह व्वक्ति में बात क्या है ? ये युवा पीढ़ी का पसंदीदा कैसे बन गया ? नई पीढ़ी का सबसे हॉट आइकॉन.
अन्ना हजारे पहली नज़र में बदलते हिदुस्तान के नए सुपरस्टार बन गए,किसी ने सोचा भी नई था की ये युवाओ के दिल में शारुख और सलमान की जगह ले पायेगा पर जब अन्ना की अंधी चली तो युवाओ के दिल में अन्ना ने अपनी जगह बना ली. क्या येः वही पीढ़ी है ? जी हां ये वही पीढ़ी है जिसके बारे में हर बुजुर्ग यही कहता है की ये अपने रास्तें से भटक चूके है,जिसे भारतीय संस्कृति और परंपरा पता तो है पर वो उससे अपनाना नहीं चाहती क्यूँ की ये सब पश्चमी सभ्यता के तरफ आकर्षित होते जा रही है और इनके गुलाम बनती जा रही है पर १६ अगस्त २०११ अन्ना का ऐसा हवा चला की वो आगे जाके आंधी का रूप ले लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नारा बन गया “हवा नहीं ये आंधी है अन्ना देश के दूसरे गाँधी है “
अन्ना ने खुद ये बात कह दी की ये जीत आज उनकी नई बल्कि उनके साथ देने वाले युवा पीढ़ी की भी है, भारत की नई ताकत युवा पीढ़ी को आज अन्ना भी मान गए की सच में भारत का भविष्य युवाओ में हे छुपा हुआ है आखिर अन्ना में ऐसी कौन सी बात थी जिससे युवा पीढ़ी उनकी तरफ आकर्षित हो गई ? आकर्षित तो होना ही था आखिर कब तक ये युवा पीढ़ी भ्रष्टाचार को सह पाती हम सब जानते है आज हर कोई इस भ्रष्टाचार से परेशान है खास कर के युवाए जिसे हर जगह भ्रष्टाचार जैसे वाइरस का सामना करना पडा चाहे वो किसी स्कूल या कॉलेज में दाखिला लेना हो या किसी कंपनी में जॉब लेना हर जगह ये वाइरस मिला ही और इस वाइरस का एंटी वाइरस अन्ना के पास ही था नई पीढ़ी पहले से ज्यादा पारदर्शी है. ज्यादा खुली जिसे भाषण नहीं बल्कि एक्शन पसंद है,पर तमाम सभ्यताओं के बावजूद उसका मन अपनी संपूर्णता में भारतीय है, इसलिए आज का युवा अन्ना को रिजेक्ट नहीं बल्कि लाईक करना चाहता था. वह उनको परखता है. गहराई में उतरकर उनको पहचानता है,वह ये भी जनता है भले ही अन्ना की सोच कुछ हद तक भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी से मिलती हो पर कर्म गाँधी वाले है इसी लिए तो अन्ना आज देश के दूसरे गाँधी माने जाते है. असल में, यह पीढ़ी अब पहले से ज्यादा जागरूक है. ज्यादा आत्मविश्वास से भरी हुई है और पूरी तरह से भारतीय है, यह पहले की पीढ़ी की तरह से कुंठित भी नहीं है, बस यही फर्क है आज की पीढ़ी अन्ना को अपना सुपरस्टार मानती है और सायेद इसी लिए आज वो एक आइकॉन बन गए है....................

Monday, August 22, 2011

अभी तो ये अंगराई है. आगे बहुत लड़ाई है

 अक्सर ऐसा होता है
जब भी किसी ने सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाया है,
उसने सिने पे गोली खाया है,
खड़े हुए उसके खिलाफ कितने,
उसे शालखो के पीछे डाला है,
हे भारतवासी अब तो जाग जाओ,
या तुमने मान लिया है किया ये भ्रष्टाचारो का जमाना है 
                                      *****
हाथ में तिरंगा लेने से कोई ना बनता ईमानदार
वो तो एक ऐसी चीज़ है,
जो आती है सूरज के किरणों के साथ और
जाती भी है सूरज के किरणों के साथ....
                             *****

ओ मेरे देश के युवाओ,
अब तो आवाज़ उठओ,
एक अकेला थक जायेगा,
उनका साथ निभाओ,
भ्रष्टाचार से आज़ाद कराओ,
भारत को फिर से स्वतंत्र बनाओ..
        *****

आवाम जाग चुकी है
सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा चुकी है
अब नई चलेगी भ्रष्टाचारो की मनमानी,
इसे हटाने की कसम आवाम ने खा चुकी है
       *****

लोकपाल को अब करेंगे हम जनलोकपाल
सरकार ये बात जान चुकी है
फिर भी कर रही है अपनी मनमानी
लगता है ये नहीं जानते
अब मिल गए हमे
२१वी सदी के कूल गाँधी
जो नहीं चलने देंगे इन काले अंग्रेजो
की मनमानी ......
   *****