Wednesday, September 7, 2011

क्या तुम ही हो मेरे सपनो की अफसरा...

तुमसे मिलके मुझे न जाने क्यूँ ऐसा लगा,
क्या तुम ही हो मेरो सपनो की अफसरा.
मन ने कुछ महसूस किया,
दिल में कुछ आहट सी हुई,
कानो ने तुम्हारी गुन गुनाहट सुनी....
तुम्हे अपने करीब पाके,
न जाने मुझे कुछ ऐसा लगा ....
क्या तुम ही हो मेरे सपनो की अफसरा ?

तुम्हारी वो पहली नज़र,
तुम्हारी वो शर्माहट,
न जाने क्यूँ छु गई मेरे दिल को |
क्या तुम्हारे दिल ने भी तुमसे कहा ..?
क्या तुम ही हो मेरे सपनो की अफसरा..

सपनो से अलग हो के,
मैं हकीकत में आता हूँ,
फिर भी क्यों ये मुझे एक सपना सा लगता है..
क्यूँ मेरा दिल ये पूछता है...
क्या तुम ही हो मेरे सपनो की अफसरा....



Tuesday, September 6, 2011

कहाँ गया मेरा वो बचपन...

जैसे जैसे घड़ी की सुई चलती गई,
मेरा बचपन मुझसे दूर होता गया...
माँ की ममता में पला बड़ा,
अब दोस्तों के बीच बैठा पड़ा...
कहाँ गया मेरा वो बचपन...
वो पापा के कंधे पर घूमना,
और आज उनके ही कंधे से कंधे मिला के चलना...
दादा की ऊँगली को अपना सहारा बनाना,
और आज उन्हें ही अपने ऊँगली का सहारा देना...
कहाँ गया वो मेरा बचपन....
ना थी किसी की चिंता,ना था किसी का  डर ..
फिर क्यूँ है मुझे आज दुनिया से वैर...
वो सुबह सुबह अपनी हस्सी की खिल खिलाहट,
और आज की सुबह में कुछ अनहोनी की आहट...
कहाँ गया मेरा वो बचपन.....


 

Monday, September 5, 2011

लाइटेंन लगा रही है तीर पे निशाना....

पोलिटिकल मैनेजमेंट में अपना नाम कमाने वाले और बिहार को लाइटेंन की रौशनी तक ही रखने वाले ,चौरंगा पाठशाला के टोप्पर रह चुके और तीर की वार से हारे हुए लालू जी रह-रह कर नितीश सरकार पे वार कर रहे है, पर अफ़सोस सफल नई हो पा रहे | १५ सालो तक बिहार में राज कर चुके लालू जी फिर से अपना राजगद्दी चाहते है,अब चाहे भी क्यूँ नहीं हर जगह से उन्हें हार जो मिल रही है पहले रेल मंत्रालय छोडना परा  और अभी हाल ही में उन्हें संसद के स्टैंडडींग कमिटी से हटाने की बात की जा रही है|
लालू जी का कहना है की नीतीश कुमार भाजपा की गोद में बैठे है और बिहार को गुजरात की तरह बनाना चाहते है, बिहार में हुए फोर्बेस्गंज फाईरिंग को गुजरात के दंगे का नाम देते हुए लालू ने कहा की वो वही कांड बिहार में दोहराना चाहते है| अब लालू जी की नजरिया ही गुजरात के प्रति अलग ही है, पर जनता की तो नहीं,आज सब जानते है बिहार कहा से कहा पहुँच गया कच्ची सड़क अब पक्की बन गई,लाइटेंन की रौशनी ट्युब लाइट में बदल गई,शिक्षा आगई पर लालू जी को कहा ये सब दिखा, विपक्ष जो रह गए वो | लालू खुद ही भूल गए की एक समय था जब वो कांग्रेस के गोद में बैठा करते थे पर उनकी चाल चलन से उन्हें कांग्रेस ने गोद से गिरा दिया | बिहार के लोगो को नितीश कुमार के खिलाफ भड्खाने वाले लालू को पता ही नई की वो आज की जनता से बात का रहे है वो समय गया जब जात-पात को लेकर जनता आपस में लड़ा करती थी, लालू जी को शायद ये नहीं पता की अब पोलिटिक्स का मैनेजमेंट कुछ अलग ही हो गया है|
एक लाइटेंन की रोशिनी कभी भी लौ नहीं बन सकता और ना ही वो कभी तीर को अपना निशाना बना सकती है,लालू जी की भलाई तो इसी में की वो अब आराम से राबड़ी के साथ लाइटेंन लाइट डीनर करे और खुश रहे क्या पता कही तीर का निशाना वो ना बन जाए और फिर उनके लिए कल हो ना हो... .....

Thursday, September 1, 2011

गांधीगीरी के बाद अब अन्नागीरी की बारी...


मोहन दास करमचंद गाँधी और किशन बाबू राव हजारे नाम अलग है पर इन दोनों महापुरुष के विचार एक  है,दोनों अहिंषा के पुजारी.एक को हम बापू के नाम से पुकारते है तो दूसरे को अन्ना के नाम से,आज पूरा भारत इन दोनों पुरषों की दीवानी है,इन्होने ने तो एक इतिहास ही रच ही दिया.
इनके उसूलों को हमने एक नया नाम दिया गाँधी के उसूलों को गांधीगीरी और अन्ना के उसूलों को अन्नागीरी.जिस तरह गांधीगीरी पर फ़्लिम लगे रहो मुन्ना भाई बनी थी बस कुछ उसी तरह अब परक्टिकल तरीके से अन्नागीरी की पढाई होगी.
झारखण्ड के जमशेदपुर शहर में स्थित महशूर संस्थान एक्स एल आर आई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड ह्उमं रेसेअर्च में जल्द हे अन्नागिरी की पढाई हो सकती है इसका मतलब ये की अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का सफल आंदोलन प्रबधन के छात्रों की पढाई के लिए उपयुक्त विषय बनेगा,और साथ ही साथ अन्ना के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के पहलुओ पर गंभीरता से विचार संस्थान करेंगी...
फ़्लिम तो सुपरहिट हो गई अब देखना ये की पढाई क्या होती है पास या फ़ैल ?........
गांधीगीरी के बाद अब अन्नागीरी की बारी...
मोहन दास करमचंद गाँधी और कृष्ण बाबू राव हजारे नाम अलग है पर इन दोनों महापुरुष के विचार एक  है,दोनों अहिंषा के पुजारी.एक को हम बापू के नाम से पुकारते है तो दूसरे को अन्ना के नाम से,आज पूरा भारत इन दोनों पुरषों की दीवानी है,इन्होने ने तो एक इतिहास ही रच ही दिया.
इनके उसूलों को हमने एक नया नाम दिया गाँधी के उसूलों को गांधीगीरी और अन्ना के उसूलों को अन्नागीरी.जिस तरह गांधीगीरी पर फ़्लिम लगे रहो मुन्ना भाई बनी थी बस कुछ उसी तरह अब परक्टिकल तरीके से अन्नागीरी की पढाई होगी.
झारखण्ड के जमशेदपुर शहर में स्थित महशूर संस्थान एक्स एल आर आई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड ह्उमं रेसेअर्च में जल्द हे अन्नागिरी की पढाई हो सकती है इसका मतलब ये की अब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का सफल आंदोलन प्रबधन के छात्रों की पढाई के लिए उपयुक्त विषय बनेगा,और साथ ही साथ अन्ना के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन के पहलुओ पर गंभीरता से विचार संस्थान करेंगी...
फ़्लिम तोह सुपर हिट हो गई अब देखना ये की पढाई क्या होती है फ़ैल या पास........