Monday, August 22, 2011

अभी तो ये अंगराई है. आगे बहुत लड़ाई है

 अक्सर ऐसा होता है
जब भी किसी ने सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाया है,
उसने सिने पे गोली खाया है,
खड़े हुए उसके खिलाफ कितने,
उसे शालखो के पीछे डाला है,
हे भारतवासी अब तो जाग जाओ,
या तुमने मान लिया है किया ये भ्रष्टाचारो का जमाना है 
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हाथ में तिरंगा लेने से कोई ना बनता ईमानदार
वो तो एक ऐसी चीज़ है,
जो आती है सूरज के किरणों के साथ और
जाती भी है सूरज के किरणों के साथ....
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ओ मेरे देश के युवाओ,
अब तो आवाज़ उठओ,
एक अकेला थक जायेगा,
उनका साथ निभाओ,
भ्रष्टाचार से आज़ाद कराओ,
भारत को फिर से स्वतंत्र बनाओ..
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आवाम जाग चुकी है
सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा चुकी है
अब नई चलेगी भ्रष्टाचारो की मनमानी,
इसे हटाने की कसम आवाम ने खा चुकी है
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लोकपाल को अब करेंगे हम जनलोकपाल
सरकार ये बात जान चुकी है
फिर भी कर रही है अपनी मनमानी
लगता है ये नहीं जानते
अब मिल गए हमे
२१वी सदी के कूल गाँधी
जो नहीं चलने देंगे इन काले अंग्रेजो
की मनमानी ......
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Thursday, August 18, 2011

क्यूँ कर रहे हो हमे गुमराह ?...

एक दुसरी आजादी का सपना हर एक हिन्दुस्तानी के दिल में था लेकिन हम आपस में ही इस बात पर बात करने से कतराते थे क्यूंकि ऐसे लोगो को लोग बेवकूफ कहती थी जब किसी एक हिन्दुसतानी ने हिम्मत की और आवाज़ उठाईं तो आज सारा हिंदुस्तान एक हो गया और वो हिन्दुस्तानी को आज बच्चा बच्चा जनता है.
अन्ना हजारे एक ऐसे समाजसेवी जिसे आज पूरा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भी जानती है हर बच्चे बूढ़े के जुबान पे बस एक ही नारा है  “अन्ना आप संगर्ष करो हम आपके साथ है.” . ७४ साल के इस समाजसेवी आज हमे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को एक जुट कर चुके है,हमे से सायेद ही कोई अन्ना का इतिहास जानता होगा उन्हें हम टी.वी या अकबार के द्वारा ही जानते है,अन्ना के बोल आज सारा हिदुस्तान बोल रहा है हर नौजवान उनके इस आंदोलन में उनका साथ दे रहा है उनके दिखाए हुए राह पर चल है पर जब मैंने फसबूक में एक विडियो देखा तो मुझे ऐसा लगा की क्या हम गुमराह हो रहे है? या हमे गुमराह किया जा रहा है? सच क्या है हमे भी नई पता पर हा हमे इतना जरुर पता है हर वोह वयक्ति जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाएगा हम उनका साथ देंगे उस विडियो के देखने से मुझे कुछ बातें याद आ गई जिस तरह भगत सिंह के लड़ाई में राम गोपाल ने अतिम वक्त पे साथ नहीं दिया था और उनके  खिलाफ गवाई दे दी थी कुछ उसी तरह अन्ना के पुराना सयोगी जो उनके साथ महाराष्ट्र के आंदोलन में उनके साथ थे आज वो उनके खिलाफ बोल रहे है उनकी बातों से ऐसा लग रहा है की वो अन्ना के खिलाफ है और हमे गुमराह करने की कोशीश कर रहे है.
अक्सर ऐसा ही होता आ रहा है जब भी किसी ने सरकार या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाया है कोई ना कोई उसके विरुद्ध खड़ा हुआ है,हम इतना जानते है अन्ना ने पहले जो भी किया जैसा भी किया हमे उनसे कोई मतलब नहीं पर आज जो वो कर रहे है वो अपने लिए नहीं हमारे लिए अपने देश के लिए कर रहे है. भ्रष्टाचार तो हमसब था पर इस लड़ाई से पहले, सब ने पहले अपने अंदर की भ्रष्टाचार को मिटाया और खुद पर इस भ्रष्टाचार के लड़ाई में,अन्ना ने भी कुछ ऐसा हे किया,उनके खिलाफ आवाज़ उठाने वालो को येः लग रहा है की वो एक अन्ना के खिलाफ आवाज उठा रहे है पर उन्हें ये नई पता की या करोड़ों अन्ना उनके सामने खड़े है,वो ये भी भूल गए की वो एक हिन्दुस्तानी है.....
मैंने निचे उस विडियो का लिंक भी दे रखा है,एक बार उससे जरुर देखे.

http://www.facebook.com/video/video.php?v=1898779597300&comments
http://khabar.ibnlive.in.com/news/58218/1
     

Wednesday, August 17, 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आवाज़


किसी ने सोचा भी ना था की १५ अगस्त के दूसरे दिन हे हमे एक और जंग लड़नी पड़ेगी,एक ऐसी आज़ादी की जंग जिसमे बच्चो से लेकर बूढ़े तक इस जंग में टूट पड़ेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने चल  पड़ेगा . 8 जून २०११ जब समाजसेवी अन्ना हजारे राजघाट में इस जंग को दूसरा स्वंतत्रता आंदोलन का नाम दिया और ये भी कहा की अगर सरकार भ्रष्टाचार को  पूरी तरह से खत्म नहीं करती और जन लोगपल बिल को मंज़ूर नहीं करती है तो वो एक बार फिर १६ अगस्त को तीन दिन के अनशन पर जायेंगे और वैसा ही हुआ.
जब अन्ना जी ने जे.पी. पार्क में अनशन करने को सरकार से अपील की तो सरकार ने उनके सामने  कुछ ऐसे शर्त रखे जो ना अन्ना जी को और ना ही उनके समर्थक को मंज़ूर था. इस बात से सरकार ने अन्ना को अनशन पे जाने का विरोध किया और १६ अगस्त की सुबह समाजसेवी अन्ना को उनके ही घर दिल्ली के मयूर विहार से उन्हें गिरफ्तार कर लिया.दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से जब येः सवाल पूछा गया की उन्होंने ने समाजसेवी अन्ना जी को क्यूँ ग्रिफ्तार किया तब उन्होंने ने ये बात कह के टल दी.” हमे उप्पर से आर्डर मिली है की अन्ना जी को अनशन करने से रोका जाये और उन्हें हिरासत में ले लिया जाए”.
इससे साफ़ तोर से ये तो पता चल ही गया की सरकार किस हद तक गिर चुकी है,सायेद सरकार ये बात भूल चुकी है की ये वही अन्ना है जिन्होंने २००० में महाराष्ट्र में आर .टी .आई यानि राईट टो इन्फोर्मेशन बिल पास करने को राज्य सरकार के नाक में दम कर दिया था और आज उन्हें ही अपने बात को सरकार के सामने नहीं रखने दिया जा रहा है.अब तो ऐसा लग रहा है की जिसने भी सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई वो शालाखो के पीछे पाया जायेगा .
सरकार ये समझ रही है की वोह एक अन्ना को रोक रही है पर वो ये नहीं जानती की अब तो करोड़ों आन्ना उनके सामने खधे हो रहे है . आवाम जग रहा है लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे है. आखिर कब तक सरकार अपने कानो को बंद रखेगी. आज जहा भी जाओ बस एक ही नारा है “ एक दो तीन चार बंद करो ये भ्रष्टाचार ” ये मैं नहीं देश की जनता देश और बच्चे कह रहे है.इस भ्रष्टाचार के लड़ाई में नै कोई हिंदू है ना को मुस्लिम है तो बस एक सच्चा हिन्दुस्तानी जो यही के रहा है की बस बहुत हो गया अब नै सहना हमे भ्रष्टाचार नहीं रहना इस भ्रष्टाचार की दुनिया में हमे चाहिए एक स्वंतंत्र भारत जिसमे भ्रष्टाचार का नामो निशान तक ना हो .........
 
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Friday, August 12, 2011

भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारो को इस देश से मिटाना है



भ्रष्टाचार  को  इस  देश  से  हटाना  है,
भ्रष्टाचारो को इस देश से मिटाना  है,
नहीं  रहना हमे  इस भ्रष्टा  नेताओ  के  बीच
इन्हें  अब जड से मिटाना है...

 अब चाहे  सर  कटे  या  दम  घुटे ..
 बस भ्रष्टाचार  के खिलाफ  कदम  बढ़ाना  है..
 हमे चाहऐ एक  स्वतंत्र  भारत ,
  अब इसे  स्वतंत्र  बनाना  है..
                                         जय हिंद








Friday, July 29, 2011

Mere Sapne


बात उन दिनों की है जब में अपने बोर्ड के रिजल्ट का इंतिज़ार कर रहा था,उन दिनों मैं बस इस सोच में डूबा रहता  था की बस अब कुछ कर दिखाना है समाज में अपना एक पहचान बनाना है ! दसवी की परीक्षा देने के बाद विज्ञान को अपना राह बनाया और इंजिनियर बनने का ख्वाब देखा पर अंतिम पडाव में आकर मुझे इस ख्वाब को छोरना परा क्यूँ की वोह समय ही  कुछ ऐसा होता है जहा हमारा सोच इस्थिर नहीं होता,इंजिनियर बना तो चाहता था पर दिल में एक डर सा था क्या इस राह को चुन कर अपनी एक अलग पहचान बन सकती है और साथ ही साथ इस बात का डर भी क्या इंजीनियरिंग में अपना कैरीअर बना पाउँगा तभी मेरे सामने एक  राह खुली जब मैं अपने भैया विवेक से मिला वह एक पत्रकार है उनसे मिलने पर मैंने पत्रकारिता के बारे में उनसे जाना और समझा कई दिनों तक सोचा घर वालो को अपनी परिशानी  बताई और अंतिम में अपने भैया को अपना आधर्ष मान कर,मैंने पत्रकार बने का फैसला किया और अपनी छोटे से शहर जमालपुर को अलविदा कह कर मैं दिल्ली आ गया. दिल्ली आके मैंने कई जगह पत्रकारिता में ग्रैजूएशन की  पढाई के लिए अपना  फॉर्म भरा और अंतिम में  दिल्ली प्रेस के इन्स्टिटूट मस्स्को मीडिया में अपना ऐड्मिशन करवाया ! इस राह को चुने के बाद मैं अपने फैसले से  काफी ख़ुश था,अब बारी थी कुछ करने की इसी दोरान फर्स्ट इयर से हे मैंने एक मैगज़ीन के लिए फ्रीलैन्स  करने लगा धीरे धीरे  मुझे इस छेत्र में मनं लगने लगा और फिर मैंने कुछ ही  महीनो में जन सन्देश जो की एक रास्ट्रीय न्यूज़ चैनल है उसमे आउट पुट विभाग में इन्टरन शिप करने लगा जहा मुझे अपने हे फिएल्ड के काफी अनुभवशाली लोगो के साथ काम करने का मौका मिला यूँ समझ लीजये की इन्स्टिटूट जो कुछ  भी मुझे सिखता था मैं वाहा उस चीज़ को प्रक्टिस करता था ! जन सन्देश में इन्टरन करने से मुझे अपने लाइन के बारे में काफी कुछ  पता चला जैसे : कैसे काम किया जाता है,कैसे न्यूज़ स्क्रिप्ट्स लिखे जाते है कोई भी प्रोग्राम को कैसे निर्देशांक किया जाता है इत्यादि  और रात की शिफ्ट में काम भी कम और शिखने को कुछ ज्यादा ही  मिलता था वहा सभी लोगो ने मुझे शिकया और मेरी मदद भी की और एक चीज़ भी जाने को मिली की हर न्यूज़ चैनल का काम करने का एक अपना एक तरीका होता है ! जन सन्देश के बाद मैं कुछ महीयने ऐसे हे बैठना चाहा पर बैठ न सका ऐसा लगा रहा था की कुछ अधुरा सा है फिर कोसिस करते करते  मुझे अपना पसंदीदा  न्यूज़ चैनल ibn 7 में इन्टरन करने का मौका मिला वहा मेरे एक और आधर्ष बने मेरे पापा के मित्र अनंत विजय अंकल मुझे उनकी हर एक बात उनका अंदाज़,पर्सनैलिटी को मैं काफी पसंद करता हूँ ! IBN 7  जो की एक बहुत हे बड़ी मीडिया कंपनी है वहा काम करने का मज्जा ही कुछ और था उस एक महीने में मैंने व
हा काफी कुछ शिखा वोह भी प्रक्टिकल तरीके से मेरे सेनिओर्स वहा मुझे काफी प्यार से समझाते और एक बड़े चैनल में कैसे  काम  करते है येः मुझे वहा शिकने को मिला..मैं इस मामले में अपने आप को काफी खुशनसीब समझता हूँ जो इतने अच्छए लोग मुझे मिले !
अभी तो मेरे सपने की सिर्फ शुरुवात हुई है और मैं अपने इस सपने को किसी भी हाल में पूरा कर के रहूँगा एक इन्देपेंदेंट और सुच्सस जौर्नालिस्ट बन के ही रहूँगा.....