Saturday, September 1, 2012

ये पल हमे याद आयेंगे . . .


ये पल हमे याद आयेंगे. . .

वो कॉलेज की बातें हम याद आयेंगे ।। 
वो स्टाइल के साथ क्लास में एंट्री करना,
वो दोस्तों का कॉम्प्लीमेंट लेना,
वो पल हमे याद आयेंगे ।।


वो अल्बीना मैडम की मुस्कान,
वो ऋतू मैडम की प्यारी बातें ,
वो पल हमे याद आयेंगे ।। 
वो झुना मैडम की क्लास,
जिसे हम करते थे बंक करके खास,
वो पल हमे याद आयेंगे ।।


ममता मैडम की लुभाने वाली बातें,
अमिया सर के छोटी छोटी बातें,
वो बातें हमे याद आयेंगे ।।
 

स्टूडियो में रुबेन सर के साथ मस्ती,
सरबजीत सर जैसे हस्ती,
हमे याद आएंगे ।।


वो एक नज़र का पहेला प्यार,
दोस्तों से  कहना ये तो,
"ये वाली तो मेरी है यार" 
वो पल हमे याद आयेंगे ।।


जा रहा हूँ आप सब से थोड़ी दूर,
ज़िन्दगी काफी लम्बी है,
हम तो लौट के जरुर आयेंगे ।। 


ये पल हमे याद आयेंगे . . .  


Tuesday, August 28, 2012

क्या कमल और पंजे पे भाड़ी पड़ेगी अन्ना की राजनीती ?



भारत में आंदोलोनो का इतिहस रहा है जब जनशैलाब सडको पर उतरी है कुछ बड़ा बदलाव हुआ ही है । जे पी  आन्दोलन सभी को याद होना चाहिए जिसने जनता के अधिकार के लिए सत्ता पार्टी जन विचारो को झकझोर दिया था और एक अमुल चुल बदलाव आया था। अन्ना  आंदोलोन को  इस नज़रिये से देखना कोई गलत नहीं होगा,लेकिन ये जन आन्दोलन के लिए था जो की बाद में जाकर  भ्रष्टाचारो के मुद्दे को भी आगे लेकर बढ़ी। इसी आंदोलोन के दौरान सत्ताधारियों का भी कहना था की अगर हम जन लोकपाल  बिल पास करने में असफल है तो क्यूँ न  टीम अन्ना अपनी सर्कार बना के इस बिल को पास कराए। यह एक हास्यपद विचार है जो जनता को कहती है की अगर कुछ संसोधन करना हो या विचारो को लागु करवाना हो तो सड़क पर मत उतरो बल्कि राजनीती में आओ।इस तरह के विचारो और बयानों से हम अंदाज़ा लगा सकते है की इन राजनीतिक पार्टियों की विचारधारा कैसी हो सकती है ।
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों रास्ट्रीय स्तर  की पार्टिया आज हासिये पर नज़र आती है संप्रग  सरकार कांग्रेस आज हर स्तर पर जनता की कमर तोड़ राखी है । आज स्थिति किसी की भी  अच्छी नहीं है चाहे वो निम्न परिवार हो मध्य या फिर उच्च वर्ग का महंगाई डाइन सबको खाए जा रही है । भला जनता के पास भी कोई विकल्प नहीं है जब कांग्रेस कुछ उम्मीद की आस इनके बाच जगाये तो जनता इन्हें सत्ते में ले आती है और अगर कांग्रेस असफल  रह गई तो बाज़ी  भाजपा मर लेती है । दोनों पार्टियों की राजनीती बिलकुल एक ही समान है पहले जनता को लूटो और जब समय चुनाव का आए तो जनता को खाद सुरक्षा बिल जैसे लुभाने वाली प्रोग्राम परोश कर अपनी तरफ खीच लेती है । अन्ना  ने तो तीसरे मोर्चे का एलान कर दी । अब सवाल ये है की  क्या टीम अन्ना ,भाजपा ,कांग्रेस जैसे विकल्प तो नहीं पेश करेगी ? क्या टीम अन्ना जनता के उमीदो पे खड़े हो पायेगी ?
अन्ना ने जनता का विचार लेकर राजनैतिक  विकल्प देने का एलान किया जहा तक सवाल जनता का विचारो का है तो इतने कम समय में ये नामुमकिन सा लगता है। अन्ना ने ये बात भी कही थी अगले डेड सालो तक देश में घुमेंगे और लोगो को जागरूक  करेंगे । अन्ना का राजनीतिक  विकल्प देना तब कामयाब साबित होगा जब अन्ना गाँव गाँव तक लोगो को जागरूक करने में समर्थ होंगे और वो इस अभियान में काफी हद तक सफल भी रहे है । इसका उदाहरण  है  अनशन के पहले ही दिन किसानो का मौजुद होना ।
बात जहा तक जन लोकपाल की है तो अब ये और भी मुश्किल हो गया है क्यूंकि अन्ना द्वारा राजनीतिक पार्टी का विकल्प देना एक तरह से उनके टीम का राजनीतिक ज़मीन पर उतरना है और ये सत्तारुद  दल शुरू दल शुरू से चाहती थी । राजनीतिक विकल्प के लिए हामी भरना कांग्रेस काफी फायदेमंद साबित होगा क्यूँकी जन लोकपाल के लिए जो आन्दोलन उन पर बार बार प्रहार कर रही थी अब वो समाफ्त हो चुकी है और राजनीतिक रूप में बदलने जा रही है ।
अब तो बस देखना ये है की क्या टीम अन्ना एक भ्रष्ट मुक्त उम्मीदवार जनता के बीच ला पाएंगे ? क्या कमल और पंजे पे टीम अन्ना की राजनीती भाड़ी पड़ेगी ?  
    



Friday, April 6, 2012

तेरी आखों  की  इन गहराई   में  मुझे डूब  जाने  दे,
          तेरी  बाहों  में  मुझे  समां   जाने  दे  ।।

ना  कर  मुझे  अपने  से  जुदा   मेरी  जान ,
इस  ज़माने  से  मुझे   डर लगता  है ।।

           थामे हाथो  में  हाथ ,
चले  हर  एक  कदम  हम  साथ  साथ ,
न  छीन   ले  मुझे, तुझसे  ये  ज़माना
इस  ज़माने  से  मुझे   डर  लगता  है ।।

ले  चल  मुझे  अपनी  प्यार  की  दुनिया  में ,
          जहा  हो  बस   मैं  और  तुम ,
            है बहुत खुदगर्ज़ ये जमाना  
      इस  ज़माने  से  मुझे   डर  लगता  है ।।

Tuesday, February 14, 2012

तेरी कमी है ..!!!

    
    दिल की बातें क्यूँ बताते थे तुम्हे ,
    इतना प्यार क्यूँ करते थे तुम्हे ।।

       
        दो पल साथ रहती थी तुम,
एक अलग सी ख़ुशी मिल जाती थी हमे ।।


कैसे समझ जाती थी मेरी ज़ज्बातों को,
कैसे जान जाती थी मेरी दिल की बातो को ।।
      
      रहते थे जब अकेले तन्हा कभी ,
  क्यूँ मन में आता था तेरा ही ख्याल ।।


            तुम्हे भूल ने  के बाद भी
         दिल में तेरी ही छवी है ।।


  कभी सोचता हूँ तेरी ओर बढ़ाने को कदम,
       पर थम जाते है कुछ सोच कर . . . ।।
 









Thursday, February 9, 2012

सोउप सोंग के बाद अब क्रिकेट सोंग : सचिन एन्थेम

"WHY THIS KOLAVERI... KOLAVERI ... KOLAVERI DI..."
भला इस गाने को लोग कैसे भूल सकते है ,देशी स्टाइल का ये गाना धनुष के द्वारा लिखा और गाया  गया है । अब इसी अंदाज़ में सुपर स्टार रजनीकांत के दामाद एक बार फिर अपने इसी देशी अंदाज़ में मास्टर ब्लास्टर सचिन पे एक गाना लिखा है जिसका नाम उन्होंने सचिन एन्थेम दिया गया। इस गाने को अभी तक 50000 हज़ार से भी ज्यादा  लोग YOU TUBE पे देख चुके,आशा किया जा रहा है की ये गाना भी उतना ही लोगो को पसंद आएगा जितना की लोगो को कोलावेरी दी पसंद आई थी ।
तमिल बिट्स पे गाया गया ये  गाना भी बिलकुल कोलावेरी दी की तरह ही शुरुवात  किया गाया है ।
BOOST को अपना सेक्रेट एनेर्गी बताने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन को इस गाने में धनुष ने सचिन को देश का एनेर्गी बताया है पुरे जोश के साथ गाया गया ये गाने में सचिन को जोश और चीयार अप देने की लिए गाया गया है। ये गाना पुरी तरह सचिन पे निर्धारित है ।
अब देखना तो ये की इस गाने का सचिन पर क्या असर होता है ,क्या इस गाने से सचिन का अब तक रुका हुआ १०० अंतरास्ट्रीय शतक पूरा हो पता है ? वो तो वक़्त हे बता सकता है
तब तक आप इस गाने का मज्जा निचे दिए गए लिंक पे जा के ले. ।
http://www.youtube.com/watch?v=mURXPSD2Q10&feature=related

Monday, February 6, 2012

राहुल की राजनीति

उत्तर प्रदेश में चुनाव का घमाशन जाडी है,जहा एक तरफ सभी राजनितिक  पार्टी विकास की बात को छोर के धर्म और जात पात के बात को लेकर लोगो के बीच अपनी बात कर रहे है वही दूसरी तरफ  युवराज राहुल वाराणसी में विकास की बात कर रहे है । प्रधान मंत्री के सपने को छोर अब राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे चाहे  उन्हें इसके लिए भले ही जूते खाने क्यूँ न पड़े। विपक्ष को दोस्सी ठहराते हुए राहुल ने ये तो कह दिया की पिछले २२ सालो में जो भी उत्तर प्रदेश में हुआ है वो सिर्फ एक अपराधिक मकर जाल है जिसको बुनने का काम खुद राजनितिक दल कर रही है। जिसके पीछे समाजवादी पार्टी,बहुजन समाजवादी पार्टी,और बीजेपी शामिल है ना की कांग्रेस,पर राहुल ये भूल गए की इसमें कांग्रेस का भी उतना ही हाथ है जितना की अन्य पार्टीयो का वह ये भूल गए की २००३ के चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था।
राहुल की ये राजनीती बिहार विधानसभा चुनाव २०१० में भी देखा गया था वह कुछ इसी तरह राहुल गाँधी ने नितीश सरकार पे भी ऊँगली उठाऐ थे वह भी  राहुल का यही कहना था की बिहार के लोगो के साथ धोखा किया जा रहा है विकास के नाम पे केंद्र से मदद मांगी जा रही है पर हो कुछ नहीं रहा। विकास की बात कर रहे कांग्रेस सचीव  क्यूँ भूल जाते  है की जब केंद्र में सात साल रह कर से उनकी पार्टी विकास के नाम पे 2G और कामन वेल्थ गमेस जैसे घोटाला किया  है तो भला कैसे जनता उनका साथ दे सकती है । जो बदलाव वह केंद्र में रह कर नहीं कर सके भला वो बदलाव एक राज्य में रह कर क्या करेंगे। जनता बह्खुबी जानती है की कांग्रेस का बदलाव कैसा होता है जिस तरह कांग्रेस ने पिछले सात सालो में देश का बदलाव किया है उसे सायेद ही कोई भूल सकता है ।बड़ते मेंगाई,घोटाले,भ्रष्टाचार से जनता अब परेशान हो चुकी है ।
जिस तरह राहुल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी  के सदस्य को लोगो के बीच खड़ा कर रहे है ऐसा लग रहा है की भले ही राहुल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने या ना बने पर राज राहुल ही करेंगे ठीक उसी तरह जैसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी कर रही है। अब जहा राहुल की मंत्री बनने की बात आती है तो हमारे मन में प्रधान मंत्री का ख्यल जरुर आता है राहुल बाबा का  ये भी कहना है की उन्हें बड़े राज नेताओ की तरह प्रधान मंत्री बनने का कोई शौक नहीं है अब भाई हो भी क्यूँ जब वह जानते ही है की उनकी पूज्य माता श्री का उस पद पे हक है ही तो भला मैं क्यूँ बनू.।
राहुल के इन सब बातो से ये तो तय हुआ है की इस बार कांग्रेस अपनी खुद की सरकार बनाएगी,ना वो धर्म की बात करेगी ना जात पात पे, बात होगी तो सिर्फ विकास की ,बस राहुल इस बात को जान ले की जनता अब वादों को सुन के नहीं बल्कि कर्म को देख कर ही अपनी  सरकार को चुनेगी भले क्यूँ ना राहुल का समर्थन जनता के साथ हो । देखना तो ये भी है की राहुल ये आत्मविश्वास और आक्रम्ख अंदाज़ क्या रंग लाता है !